आजमगढ़ :- नामांकन स्थलों पर भारी गहमागहमी दिखाई दी लेकिन महीनों से चुनाव की तैयारी कर रहे कई प्रत्याशियों को ऐन मौके पर खुद के ही वोटर ना मिलने का जब फरमान मिला तो उनके हाथों से तोते उड़ गए। अब प्रत्याशी चुनाव लड़ने की बजाय वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। हालांकि ज्यादातर जगह से उनको निराशा ही मिल रही है।

ऐसा ही एक मामला आजमगढ़ के मेहनगर तहसील के अंतर्गत रासेपुर चुनाव का है जहां से जिला पंचायत सदस्य के रूप में बेचन रजक और उनकी पत्नी काफी दिनों से अपने चुनाव की तैयारी में लगी हुई थीं। लेकिन जब वह नामांकन करने पहुंचे तो पता चला कि वोटर लिस्ट में उनका नाम ही नहीं आया। बेचन रजक हाथों में तमाम कागजातों को लेकर भाग दौड़ करने को मजबूर दिखे। उनका कहना था कि आज तक सभी चुनाव में वह वोटर रहे हैं।

उनके पास सभी पात्रता मौजूद उनके पास मतदाता पहचान पत्र भी है। हर प्रकार का आईडी कार्ड है लेकिन इसके बाद ही रहस्यमय परिस्थिति में उनका नाम और उनके परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिया गया जिससे उनके सारी योजना पर पानी फिर गया और उनको मानसिक आर्थिक क्षति पहुंची है। अब जिला निर्वाचन अधिकारी से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

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